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इक भोली, इक पगली लड़की,,,,,,,,,,

February 6th, 2010 by prateek.

जब भी मेरी खिड़की पर, पूनम की खिलती रात आती है.
इक भोली सी इक पगली सी, लड़की अक्सर याद आती है.
दिल की धड़कन बढ़ जाती है, लफ्जों में कम्पन होता है.
जब भी प्यार भरी महफ़िल में, मेरी उसकी बात आती है.
इक भोली सी इक पगली सी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
मैं फिर से खो जाता हूँ, एहसासों की गहराई में.
जब भी पुरानी चिट्ठी उसकी, कॉपी में मिल जाती है.
इक भोली सी इक पगली सी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सोते में पलकें भी ,मेरी तारों सी चमकने लगती हैं ,
जब भी मेरे ख्वाबों में, वो चुपके से आ जाती है .
इक भोली सी इक पगली सी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
वो मंद-मंद मुस्काती है, कुछ गर्व सा मुझको होता है ,
जब मेरी गजलें नज्में मेरी, आँखों में पढ़ जाती है .
इक भोली सी इक पगली सी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अब ये दूरी खलती है, ये तन्हाई तड़पाती है ,
जब वो भोली पगली लड़की, मिलने बरसों बाद आती है .
इक भोली सी इक पगली सी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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