बारिश सर्द गर्म होती है
नर्म धूप की हमजोली होकर
वह कैसी मद्धम मद्धम होती है
बारिश क्या कभी सर्द गर्म भी होती है ?
भीनी सी माटी की गंध में
रौंध्ती हुई छ्प सी बूँद सवाल नहीं पूछती
और बस यूंही आसरे में जूझती
बारिश की सर्द सी चादर को
छोडती गर्म करवट में छिपती सी बूँद
उत्तर दे जाती है
कि बारिश तो होती ही रहती है पर …
बूँद का अस्तित्व तो शायद……… गर्म
और फिर एक और अंतहीन किरणों का झुण्ड
टकराता है और बिफरता है दायरों के पार
एक बड़े से रंगीन पैमाने में
उसके अस्तित्व पर शायद
बादलों, विहगों का संसार चलता होगा
पर कितने क्षणभंगुर स्वाभिमान को
लेकर इतराता वह शायद …….सर्द
बारिश तो सर्द गर्म होती है
और मद्धम मद्धम होती है
बारिश भी……………..सर्द गर्म …
—-प्रज्ञा
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beautiful..very well written..and the background goes well with the lines
Thanks so much Rahul !! And this background was a deliberate choice
verry good…….barish intni sunder hoti hai pahle kabhi nahi jana tha…..
thanks
thanks so much kamal for such beautiful comment..baarish isse bhi jyada sundar hoti hai