मैंने पूछा….
ओ सुबह के फूल
पनीली आँखों से
मुस्कुराता क्यों है…!
बोला
दो पल के जीवन में
खुश रहता हूँ
मुस्कुराता हूँ
करुणा से आँखें नम करता हूँ….
ये जानते हुए की
पतन निश्चित है
दिन भर झूमता हूँ
ये क्या कम करता हूँ ;
और तुम….
हँसे खुल कर
न जी भर रोये
अपने ही कन्धों पर
अपनी ही लाश ढोए
कभी झूमते…
सुनते दिल की आवाज़
बजाते मस्ती का साज़
तो शायद समझ सकते
पनीली आँखों से
मुस्कुराने का राज़
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पनीली आँखों से मुस्कुराता क्यों है
August 21st, 2010 by padmsingh.Click here to view the website/blog of padmsingh.

























