मैं एक राही हूँ , चलता चला जाता हूँ .
हवा के साथ बहता हूँ , स्थिरता में नीरसता पाता हूँ मैं .
कश्ती का पाल हूँ मैं , जैसे ढालो ढल जाता हूँ मैं .
ज़माना कहता है व्यवहारिक बनो , ये सुन कर सोचने लग जाता हूँ मैं .
कुछ देर के लिए जो आँखें खोलता हूँ , मंज़र देख कर घबराता हूँ मैं .
दुनिया की इन तमाम रंजिशों में , खुद को हारा हुआ पाता हूँ मैं .
फिर सोचता हूँ क्यूँ मैं बनूँ समझदार , क्यूँ करूँ इन्सान के साथ जानवर सा व्यवहार ?
बस यही सोच कर खुद को समझाता हूँ मैं . दिल की सुन कर ही दिल का सुकून पाता हूँ में .
और बस अपनी ही धुन में गाता हूँ मैं ,
राही हूँ , हवा के साथ बहता चला जाता हूँ मैं .


























वाह खूबसूरत ख्याल
समाज में ऐसे राहगीरों की बहुत ज़रूरत है
life is about moving on ..well written
Very nice heart Touching Words.