रूखे तुम भी थे
कठोर मै भी
दोनों के बीच
एक डोर थी
नाज़ुक सी..
थोड़े नम जो तुम हो जाते
थोड़े कोमल हम
बस वो डोर सुदृढ़ हो जाती…
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रूखे तुम भी थे
कठोर मै भी
दोनों के बीच
एक डोर थी
नाज़ुक सी..
थोड़े नम जो तुम हो जाते
थोड़े कोमल हम
बस वो डोर सुदृढ़ हो जाती…
awesome …very well said