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जिन्दगी

February 27th, 2010 by Divyansh.

क्या क्या नही कराती है जिन्दगी
खुशी की बा्रिश में बिघाती है ये जिन्दगी
गम की धूप मे तपाती है जिन्दगी
जवानी में अपनी पहचान बनने के लिये बगाती है जिन्दगी
बुरापे में सन्घर्श कराती है जिन्दगी
इस जिन्दगी से कैसे करे शिकवा
चोती चोती खुशियो से झिलमिलती है जिन्दगी
लेकिन
जिन्दादिली से जिने का नाम है जिन्दगी
दोडते भागते हसने क नाम है जिन्दगी
गम मे भी खुश रहने क नाम है जिन्दगी
और अगर कुच्ह भी न कर सके तो
जिन्दगी से हारन भी सिखती है जिन्दगी

क्या क्या नही कराती है जिन्दगी

खुशी की बा्रिश में बिघाती है ये जिन्दगी

गम की धूप मे तपाती है जिन्दगी

जवानी में अपनी पहचान बनने के लिये बगाती है जिन्दगी

बुरापे में सन्घर्श कराती है जिन्दगी

इस जिन्दगी से कैसे करे शिकवा

चोती चोती खुशियो से झिलमिलती है जिन्दगी

लेकिन

जिन्दादिली से जिने का नाम है जिन्दगी

दोडते भागते हसने क नाम है जिन्दगी

गम मे भी खुश रहने क नाम है जिन्दगी

और अगर कुच्ह भी न कर सके तो

जिन्दगी से हारना भी सिखती है जिन्दगी

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2 Responses to “जिन्दगी”

  1. ravindra says:

    सुंदर है लेकिन टाईप बराबर नही हुआ है. कृपया सुधारे.

  2. Divyansh says:

    mein iske liye shama chahta hun. meri typin thodi kamzor hai…:-(

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