कितनी करुणा, कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
आँसू लेते वे पद प्रखार !
हँस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता ओठों का विषाद,
छा जाता जीवन में वसन्त
लुट जाता चिर संचित विराग
आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार !
By – Mahadevi Verma


























truly a classic..thanks a lot madhavji for posting it